ब्लॉग में मुझे लिखना चाहिए, इसके लिए हमारे संस्थान की अँगरेजी सह-संपादक और मेरी वरिष्ठ मित्र श्रीमती अनीता झा जी ने प्रेरित किया। ब्लॉग का अकाउंट भी खोल दिया। इसके सारे व्याकरण भी समझा गईं। उन्हें बहुत-बहुत धन्यवाद देता हूँ। जीवन के हर क्षेत्र में सिखने के लिए एक योग्य और अनुभवी प्रशिक्षक की आवश्यकता होती है। बस हमें जिज्ञासु होना चाहिए।
पिछले दिनों अनीता जी ने जब लिखना शुरू किया था तो उन्होंने हिंदी के संबंध में लिखा था। मुझे अच्छा लगा कि लेखन-संबंधी अनेक कठिनाइयों के बावजूद उन्होंने हिंदी में लिखना शुरू किया है। हिंदी के लिए यह अच्छी बात है और हम जैसे हिंदी-सेवकों के लिए प्रसन्नता की बात। उन्हें इस निर्णय के लिए बधाई देता हूँ। वे लिखें और खूब लिखें। मैं आगे हिंदी के सम्बन्ध में ही लिखना चाहूँगा।